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ज्ञानवापी पर इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, व्यास तहखाने में जारी रहेगी पूजा-पाठ

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Feb 26 2024 12:31PM | Updated Date: Feb 26 2024 12:31PM
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ज्ञानवापी मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आज यानी सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष की पूजा जारी रहेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले वाराणसी की जिला अदालत ने भी मुस्लिम पक्ष को झटका देते हुए हिंदुओं के हक में फैसला सुनाया था। जिला अदालत के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि यहां भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया है। 

ज्ञानवापी मामले में अधिवक्ता प्रभाष पांडे ने कहा कि आज अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है... पूजा जारी रहेगी..। सनातन धर्म के लिए यह बड़ी जीत है... वे(मुस्लिम पक्ष) इसमें रिव्यू कर सकते हैं या सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया की दोनों याचिकाओं को खारिज कर दी है, इसका मतलब है कि जो पूजा चल रही थी वह वैसे ही चलती रहेगी... अगर वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे तो हम भी सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखेंगे।  वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि आज, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अंजुमन इंतजामिया के आदेश की पहली अपील को खारिज कर दिया है जो 17 और 31 जनवरी के आदेश के खिलाफ निर्देशित की गई थी। आदेश का प्रभाव यह है कि ज्ञानवापी परिसर के 'व्यास तहखाना' में चल रही पूजा जारी रहेगी। अगर अंजुमन इंतजामिया सुप्रीम कोर्ट आती है तो हम सुप्रीम कोर्ट में अपनी कैविएट दाखिल करेंगे।

इससे पहले अयोध्या में ज्ञानवापी मामले को लेकर राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि सर्वेक्षण के बाद कोर्ट ने आदेश दिया था कि पूजा होनी चाहिए... हाईकोर्ट इसे नहीं रोक सकता क्योंकि रोकने का कोई आधार नहीं है। यह मंदिर था और वहां पूजा होती थी... मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। जिस तरह राम जन्मभूमि का फैसला आया था, उसी तरह ज्ञानवापी का फैसला भी आएगा क्योंकि हिंदू पक्ष के पास उचित सबूत हैं।" श्री हनुमानगढ़ी मंदिर के मुख्य पुजारी रमेश दास जी महाराज ने कहा कि ज्ञानवापी व्यास परिवार को पहले भी पूजा का अधिकार था, वे पूजा करते थे। आज भी उम्मीद है कि इलाहाबाद न्यायालय से उन्हें ही पूजा करने का फिर मौका मिलेगा।

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